शनिवार, 4 मार्च 2017

दो कौड़ी का मान सम्मान

व्यंग

असली  इज्जतदार  दो कौड़ी के हो गए हैं

अपने मान सम्मान को लेकर हम भारतीय खतरे के निशान तक संवेदनशील है मान सम्मान की हम सबसे ज्यादा चिंता करते हैं सड़क पर चलते हुए हम सामने से आ रहे वाहन से टकरा जाते हैं लेकिन बड़ी से बड़ी टक्कर में हम अपने मान सम्मान को चोट नहीं लगने देते बावजूद इसके विचित्र किंतु सत्य यह है कि भारतीय

अदालतों में सबसे कम विवाद मानहानि को लेकर फैसले के लिए पहुंचते है हमारा मान सम्मान कभी इतना घायल नहीं होता कि हम अदालतों की शरण में जाकर उसकी रक्षा की गुहार लगाएं मान सम्मान के विवादों के फैसले शायद कभी होते भी नहीं ऐसे विवादों में मान-सम्मान धारक चुप मार कर बैठने मैं ही अपने मान सम्मान को सुरक्षित मानता है अदालतों में मान सम्मान के विवाद चतुर्थ श्रेणी के विवाद माने जाते हैं विद्वानों का यह मानना है कि औसत भारतीय का मान-सम्मान न कहीं आता है ना कहीं जाता है मान सम्मान उस आत्मा की तरह है जो कभी मरता नहीं प्रयत्न करके इस आत्मा को कोई बदल तो कर सकता है पर इस आत्मा को कभी नष्ट नहीं कर सकता बावजूद इसके बहुत से लोग मान सम्मान को लेकर बड़े व्याकुल दिखाई देते है इनका कर्म  कुकर्म इनके तथाकथित मान सम्मान को लेकर चलते ही रहते हैं बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनका कोई मान सम्मान नहीं होता लेकिन ऐसे लोगों को हमेशा लगता रहता है क़ि लोग जो कुछ कर रहे हैं वह इनके मान सम्मान से जुड़ा है पिछले एक दशक में मान सम्मान की परिभाषा में बड़े परिवर्तन हुए हैं इज्जतदार की इज्जत को देखने का नजरिया बदल गया है एक से बढ़कर एक कुख्यात अपराधी भ्रष्टाचारी बलात्कारी और आतंकवादी इज्जतदार मान लिए गए हैं और सच्चे इज्जतदार हाशिए पर धकेल दिए गए कुख्यात इज्जतदार की इज्जत आज खराब नहीं होती पर उसकी सामाजिक बेज्जती पर दाग लग जाता है आज के समाज में मर्दो की इज्जत उतारी जाती है जबकि महिलाओं की इज्जत लुटे जाने की परंपरा है बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो डरा-धमकाकर लोगों से अपनी इज्जत करवाते हैं बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो पैसा खर्च करके बकायदा मान-सम्मान खरीदने का काम भी करते हैं जुगाड़ तंत्र इतना लचीला है कि इसमें मान सम्मान की कीमत बहुत कम हो गई है आप का जुगाड़ है तो आप बड़ा से बड़ा सम्मान झटक सकते हैं आज खरीदा तो कोई भी सम्मान जा सकता है आज कोई किसी को सम्मान देता नहीं सम्मान पाने की व्यवस्था बनानी पड़ती है दबंग लोग आज भी छोटी जाति के लोगों को पटककर सम्मान देने के लिए विवश कर देते हैं बहुत से लोगों को सम्मान पाने और देने की चिंता नहीं रहती ऐसे लोग  असम्मानित होकर भी प्रसन्न रहते हैं सम्मान को ऐसे लोग माया मानते हैं इसकी सीधी छाया से उन्हें बहुत डर लगता है ये लोग बेइज्जती प्रूफ होते हैं इनकी चाहे जितनी बेइज्जती कर दी जाए इन पर कोई असर नहीं होता गैंडे की खाल मैं छुपे ऐसे लोग इस बेज्जती को अपना सम्मान मानते हैं पारंपरिक मान सम्मान को लेकर अब इज्जतदार लोग कोई चिंता नहीं करते ऐसे लोगों का मानना है कि इज्जत तो आती जाती रहती है इज्जत का आना जाना ही जिंदगी का खेल है मजेदार बात यह है कि जो इज्जत दार जिंदा रहते समाज में खूब बेइज्जत होते हैं मरने के बाद उनकी सबसे ज्यादा इज्जत होती है बे इज्जत लोगों के कारनामे और करतूत उनके मरने के बाद माफ कर देने की स्वस्थ परंपरा ने लोगों के दिलों से जिंदा रहते बेइज्जत होने का डर निकाल दिया है आज मान सम्मान और अपमान एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं किसी के मान सम्मान को अपमान और अपमान को मान सम्मान में बदलने का कारोबार भी धड़ल्ले से चल रहा है मीडिया पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस काम को बकायदा पैसे लेकर कर रहा है नकली इज्जतदार ने असली इज्जतदार को चलन से बाहर कर दिया है असली इज्जतदार दो कौड़ी के हो गए है ।

- अजामिल
चित्र अजामिल

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