''Right to live'' should be equal for Animals and Human......Think it.
शेर , बाघ या हीरण मारने पर देश का कानून सजा का निर्धारण करता है और बकरा , गौ , मुर्गे और मछली को मारने पर कोई कानून नही जबकि हत्या तो हत्या ही है जिसको भगवान ने धडकता हुआ दिल , सांस लेने का अधिकार दिया है उसकी हत्या एक जुर्म मानी चाहिए और रोक लगाने का कदम उठाना चाहिए वो चाहे मनुष्य की हत्या हो या किसी पशु, पंछी की.......
''जीवन का अधिकार सब का ही है''.......... संविधान में संशोधन की आवश्यकता है......
अगर राक्षस ढूंढने हो तो प्राचीन युग मे जाने की आवश्यकता नहीं .....ये चिकिन,बिरियानी ,मटन आदि खाने वाले गिद्ध आपको अपने आस पास ही मिल जाएगे। सात्विक भोजन के लाखो विकल्प है , अनेक व्यंजन है , पर नहीं ये तो मुर्गो ,और बकरो को काट काट कर ही खाएँगे कलयुग के राक्षस का तमगा तभी तो मिलेगा ऐसे लोगो को ।
थोड़ा सोचो ...मनुष्य हो या पशु......... देह का आकार अलग है , देह कीबनावट अलग है ... पर आत्मा तो दोनों मे एक सी ही है ..... शरीर स्वयं तो नहीं जीता आत्मा ही उसेजीवटता प्रदान करती है तो
एक मनुष्य की हत्या करने पर जितना पाप लगता है उससे भी अधिक पाप एक पशु की हत्या करने पर लगता है , पशु पर अधिक इसलिए क्यो को इंसानगलतिया करते है पाप भी करते है उनकी हत्या पर पाप कम होगा किन्तु तुम कुत्ते जिन निर्मुक जीवो की खाल को खींच खीच कर उनके मास को नोचते हो उन्होने तुम्हारा न कुछ बुरा किया न वो कुछ गलत करते है ।
तुम्हारी एक उंगली थोड़ी सी कट भी जाये तो कितनी पीड़ा होती होगी तुम्हें ..... सोचो उस बेचारेपशु को जब काटा जाता होगा तो क्या उसे पीड़ा नही होती होगी वोचिल्ला नहीं सकता पर आत्मिक चीख तो उसकी भी निकल पड़ती होगी जब वो देखता होगा हा अब उसे काटकर कुछ नीच , राक्षस अपना भोजन बनाने वाले है ।
जो मास खाते है वो ये बताए अगर तुम्हारी संतान को कोई काटकर ऐसे ही .......तो ????? अगर तुम अपनीसंतान की एक उंगली में थोड़ा सा खून भी नहीं देख सकते तो फिर निर्मुक जीवो को काटकर तुम लोग कैसे खा जाते हो ? अगर तुम जानवरो को को मार कर खा सकते हो तो इन्सानो का भी मास खाना तुम लोगो के लिए कोई बड़ी बात नहीं है । तो किसी पशु को खाने का अधिकार तुम्हें तभी होगा यदि तुममे अपनी संतान को काटकर खाने की हिम्मत है और तुम खा भी सकते हो क्यो की दया ,प्रेम जैसे भाव तो तुम्हारे उसी दिन खत्म हो जाते है जब तुम मास सटकते हो ।
तुम जानवरो का मास खा रहे हो .......तो तुम्हारी औलादों इन्सानो का मास खाने से परहेज नहीं करेगी.........जो भी आज इन्हे काट रहे है , या मास भक्षण कर रहे है ... वो याद रखे एक दिन उन्हे भी ऐसे ही काटकर खाया जाएगा .......
और में अपनी तरफ से उन्हे एक सुझाव दूंगा --"आगर तुम लोगो की प्रवर्ती राक्षसो जैसी ही हो गयी है .....और असात्विक भोजन ही करना है तो किसी शोचलाय में जाकरमलभक्षण कर लिया करो ...... मास खाने से तो अच्छा रहेगा ये तुम्हारे लिए, पाप भी नहीं लगेगा। और फिर ये तुम लोगो के लिये बड़ी बात थोड़े ही है जब तुम लोगे अंडे से मुर्गे के वीर्य कोनिकालकर तल कर खा सकते हो तो ये कौन सी बड़ी बात है ............... ............... .......... अब भी संभल जाओ........ जय जय श्री राम
शेर , बाघ या हीरण मारने पर देश का कानून सजा का निर्धारण करता है और बकरा , गौ , मुर्गे और मछली को मारने पर कोई कानून नही जबकि हत्या तो हत्या ही है जिसको भगवान ने धडकता हुआ दिल , सांस लेने का अधिकार दिया है उसकी हत्या एक जुर्म मानी चाहिए और रोक लगाने का कदम उठाना चाहिए वो चाहे मनुष्य की हत्या हो या किसी पशु, पंछी की.......
''जीवन का अधिकार सब का ही है''.......... संविधान में संशोधन की आवश्यकता है......
अगर राक्षस ढूंढने हो तो प्राचीन युग मे जाने की आवश्यकता नहीं .....ये चिकिन,बिरियानी ,मटन आदि खाने वाले गिद्ध आपको अपने आस पास ही मिल जाएगे। सात्विक भोजन के लाखो विकल्प है , अनेक व्यंजन है , पर नहीं ये तो मुर्गो ,और बकरो को काट काट कर ही खाएँगे कलयुग के राक्षस का तमगा तभी तो मिलेगा ऐसे लोगो को ।
थोड़ा सोचो ...मनुष्य हो या पशु......... देह का आकार अलग है , देह कीबनावट अलग है ... पर आत्मा तो दोनों मे एक सी ही है ..... शरीर स्वयं तो नहीं जीता आत्मा ही उसेजीवटता प्रदान करती है तो
एक मनुष्य की हत्या करने पर जितना पाप लगता है उससे भी अधिक पाप एक पशु की हत्या करने पर लगता है , पशु पर अधिक इसलिए क्यो को इंसानगलतिया करते है पाप भी करते है उनकी हत्या पर पाप कम होगा किन्तु तुम कुत्ते जिन निर्मुक जीवो की खाल को खींच खीच कर उनके मास को नोचते हो उन्होने तुम्हारा न कुछ बुरा किया न वो कुछ गलत करते है ।
तुम्हारी एक उंगली थोड़ी सी कट भी जाये तो कितनी पीड़ा होती होगी तुम्हें ..... सोचो उस बेचारेपशु को जब काटा जाता होगा तो क्या उसे पीड़ा नही होती होगी वोचिल्ला नहीं सकता पर आत्मिक चीख तो उसकी भी निकल पड़ती होगी जब वो देखता होगा हा अब उसे काटकर कुछ नीच , राक्षस अपना भोजन बनाने वाले है ।
जो मास खाते है वो ये बताए अगर तुम्हारी संतान को कोई काटकर ऐसे ही .......तो ????? अगर तुम अपनीसंतान की एक उंगली में थोड़ा सा खून भी नहीं देख सकते तो फिर निर्मुक जीवो को काटकर तुम लोग कैसे खा जाते हो ? अगर तुम जानवरो को को मार कर खा सकते हो तो इन्सानो का भी मास खाना तुम लोगो के लिए कोई बड़ी बात नहीं है । तो किसी पशु को खाने का अधिकार तुम्हें तभी होगा यदि तुममे अपनी संतान को काटकर खाने की हिम्मत है और तुम खा भी सकते हो क्यो की दया ,प्रेम जैसे भाव तो तुम्हारे उसी दिन खत्म हो जाते है जब तुम मास सटकते हो ।
तुम जानवरो का मास खा रहे हो .......तो तुम्हारी औलादों इन्सानो का मास खाने से परहेज नहीं करेगी.........जो भी आज इन्हे काट रहे है , या मास भक्षण कर रहे है ... वो याद रखे एक दिन उन्हे भी ऐसे ही काटकर खाया जाएगा .......
और में अपनी तरफ से उन्हे एक सुझाव दूंगा --"आगर तुम लोगो की प्रवर्ती राक्षसो जैसी ही हो गयी है .....और असात्विक भोजन ही करना है तो किसी शोचलाय में जाकरमलभक्षण कर लिया करो ...... मास खाने से तो अच्छा रहेगा ये तुम्हारे लिए, पाप भी नहीं लगेगा। और फिर ये तुम लोगो के लिये बड़ी बात थोड़े ही है जब तुम लोगे अंडे से मुर्गे के वीर्य कोनिकालकर तल कर खा सकते हो तो ये कौन सी बड़ी बात है ............... ............... .......... अब भी संभल जाओ........ जय जय श्री राम
- पंडित राजन शर्माजी

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें