चोरी-चमारी
भ्रष्टाचार हत्या बलात्कार अपहरण घोटाला महा घोटाला नीचता कमीनापन अधर्म
कुकर्म की जब कभी भी आगे आने वाले इतिहास में चर्चा होगी तब उत्तर प्रदेश
का नाम इन सदगुणों को अपनाने वाले भारतीय राज्यों में सबसे ऊपर स्वर्ण
अक्षरों में लिखा जायेगा यह दुर्भाग्यपूर्ण है की उत्तर प्रदेश को आज़ादी के
बाद राज्य सँभालने के नाम पर जो भी नेतृत्व मिला वह स्वार्थी भ्रष्ट और
नीचता की पराकाष्ठा पर रहा. यहाँ की जनता अपनी छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर
त्राहि-त्राहि करती रही और यहाँ के अवसर वादी परिवारवादी नेता जनता के पैसे
पर अय्याशी करते रहे. दूसरे राज्य के लोग उत्तर प्रदेश का क्या मुकाबला
करेंगे. 100-50 करोड़ का घोटाला करके अन्य राज्यों के नेता अपने आपको तीस
मार खां समझते हैं उत्तर प्रदेश में महाकुम्भ घोटाला ही हजारों करोड़ का हो
गया आपको उत्तर प्रदेश के नेताओं, कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारिओं,
प्रशासन के लोगों नेताओं और हजारों बाबुओं के चेहरे पर शर्म दिखाई दे रही
है. नीचता ने इन्हें बे शर्मी की भी पराकाष्ठा पर पहुंचा दिया है. जबसे
उत्तर प्रदेश का शाशन एक पिता ने भावुकता में अपने बच्चे को सौंप दिया है
तबसे इस राज्य में खेल ही खेल हो रहा है. विकास के सारे कार्य भरपूर पैसा
दिए जाने के बावजूद रुक गए हैं. जिसे देखिये वही अपनी जेब भर रहा है और
सरकार भ्रष्टाचारीयों, अपराधियों और मक्कारों की पीठ थप थपा रही है और ऐसा
हो भी क्यों न आखिर उत्तर प्रदेश कमीने पन में किसी से पीछे थोई न रहना
चाहेगा. बड़े भाई खुशी मनाईये हम नीचता में लल्लन टॉप हैं और इलाहाबादी हैं
इसलिए हमसे आगे कौन जायेगा- सत्य वचन से साभार.
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