उत्तर
प्रदेश सरकार ने प्रदेश के नौ लाख बेरोजगारों को बेरोज़गारी भत्ता देने का
इरादा बनाया था खजाने से इस खैरात को बटने के लिए जुगाड भी कर लिया गया था
लेकिन हाय रे सरकार की मजबूरियां. कुल मिला कर तीन लाख स्वाभिमानी सम्मानित
लोगों ने इस खैरात के लिए फॉर्म भरा और बाकी छे लाख लोगों को खैरात देने
के लिए सरकार इंतज़ार ही करती रह गयी. इन तीन लाख लोगों में से लगभग दस हज़ार
लोगों को लाखों रुपय खर्च करके एक भिक्षादान कार्यक्रम में प्रदेश के
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खैरात के चेक दिए. बाकी लोग भी चेक का इंतज़ार
कर रहे हैं. आशचर्य है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस तरह की खैरात बात
कर मुफ्तखोरी और हरामखोरी को तो बढ़ावा दे रहे हैं लेकिन उनकी समझ में यह
बात नहीं आ रही है कि बेरोज़गारी भत्ते के उम्मीदवार सम्मानित लोगों को नए
उद्योग स्थापित करके काम पर कैसे लगाया जाये. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की
सरकार में जिन मंत्रियों से यथासमय कुछ
बोलने की जनता आशा भी करती रही वो मुलायम सिंह यादव के डर के मारे चूहा बने
बैठे हैं. बिल से निकले नहीं कि दबोच लिए जायेंगे इसलिए इन मंत्रियों ने
सोह लिया है कि चुप रहने में ही फायेदा है कम से कम लाल बत्ती की गाड़ी तो
बनी रहेगी पिछले दिनों आज़म खां साहब ने कुछ विचार रखे थे तब मुलायम सिंह
यादव ने उनसे कहा था कि आप काफी योग्य हो गए हैं राजनीति की समझ भी आपकी
काफी बढ़ गयी है आपको दिल्ली की राजनीति करनी चाहिए उसके बाद आज़म खां साहब
को किसी ने बोलते नहीं सुना. ज़ाहिर है कि अब कोई ऐसा नहीं जो प्रदेश के
मुख्यमंत्री को समझा सके कि उन्हें देश के युवाओं के बीच बेरोज़गारी भत्ता
बाँट कर हरामखोरी को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. हाँ यह भी सोचना होगा कि बाकी
छे लाख बेरोजगारों की सरकारी अधिकारी कहीं कोई सूची तैयार करवा कर इनके
हिस्से का बेरोज़गारी भत्ता कहीं खुद न लेले क्योंकि प्रदेश में यही तो
काबिल लोग हैं जो सरकार में आते ही परमानेंट बेरोजगार हो जाते हैं.- सत्य
वचन से साभार.
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