शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

स्वर्गीय महादेवी वर्मा को मिला भूमि भवन कर और भी जलकर विभाग का नोटिस

**इलाहाबाद नगर निगम ने स्वर्गीय महादेवी वर्मा को दी भूमि भवन कर और जल कर जमा करने की नोटिस

इलाहाबाद नगर निगम ने छायावाद की सुप्रसिद्ध कवियत्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा को उनके आवास के संदर्भ में भूमि भवन कर और जल कर जमा करने की नोटिस दी है सुनिश्चित समय के भीतर अगर कर जमा नहीं कराया जाएगा तो नगर निगम ने नोटिस में उनकी संपत्ति को कुर्क करने के लिए भी कहां है नगर निगम की इस बचकानी हरकत से इलाहाबाद के साहित्यकारों को बहुत पीड़ा पहुंची है और उन्होंने इसे स्वर्गीय महादेवी वर्मा का अपमान बताया है इलाहाबाद में मूर्धन्य साहित्यकारों की स्मृतियों को सहेजने और उनके सम्मान को बनाए रखने की कोई परंपरा नहीं है इसी शहर में सुमित्रानंदन पंत सूर्यकांत त्रिपाठी निराला रघुपति सहाय फिराक डॉ रामकुमार वर्मा उपेंद्रनाथ अश्क आदि बहुत से ऐसे साहित्यकार हुए हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य को अपनी कालजई रचनाओं से समृद्ध किया है लेकिन दुख इस बात का है कि इन वरिष्ठ साहित्यकारों की कोई स्मृति इलाहाबाद में देखने को नहीं मिलते जिन महादेवी वर्मा को इलाहाबाद नगर निगम नोटिस देकर अपमानित कर रहा है इसे देखकर ही पता चलता है कि हम अपने साहित्यकारों का कैसा सम्मान करते हैं विदेशों में साहित्यकारों की स्मृतियों को सरकार और समाज के लोग मिलकर संग्रहालय बनाकर सहेजने का कार्य करते हैं महादेवी वर्मा का निवास उनकी स्मृति से जुड़ी धरोहर बहुत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति है महादेवी वर्मा के निवास को नगर निगम एक खूबसूरत संग्रहालय में बदल सकता है जहां महादेवी वर्मा की स्मृतियों से जुड़ी छोटी-छोटी चीजों को सही जा जा सकता है ऐसा किया जाए तो निश्चय ही यह साहित्य का मंदिर होगा जिसे देखने के लिए बाहर से इलाहाबाद आने वाले पर्यटक वहां जाना चाहेंगे परंतु इलाहाबाद का नगर निगम ऐसा क्यों करने लगा हो सकता है कि वह इस बेनामी संपत्ति को अपने कब्जे में लेकर यहां कोई बिजनेस कांप्लेक्स या रिहाइशी कॉलोनी बनाने की योजना को अंजाम देना चाह रहा हूं अगर ऐसा होता है तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ नहीं होगा नगर निगम की इस हरकत के बाद यह बात साफ हो गई है कि अभी हमें अपने साहित्यकारों कलाकारों रंगकर्मियों शिक्षकों आदि समाज को अपना सब कुछ देने वाले लोगों का सम्मान करना सीखना अभी बाकी है ।

** रिपोर्ट अजामिल

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

Facebook मेरा अनुभव

फेसबुक पर वापसी:मेरा अनुभव
         आज बहुत दिनों के बाद फेसबुक पर वापस आ रहा हूँ। इस बीच यही आकलन करता रहा क़ि फेसबुक पर रहकर मुझे क्या हासिल हुआ और क्या मैंने खो दिया। यह सच है क़ि फेसबुक पर होना धीरे धीरे एक लत के साथ होना जैसा है। एक नशा कुछ मजेदार तो कुछ दुःख दायी। लगभग तीन साल हो गए मुझे इस माध्यम का इस्तेमाल करते। चार हज़ार मित्र हैं। इनमें चालीस ऐसे है जिनके साथ निकटता महसूस करता हूँ। बाकी मित्रों के साथ संवाद तो कभी नहीं हुआ लेकिन इनकी पोस्ट पढता रहा हूँ। बहरहाल इतने दोस्तों का होना और इनका स्नेह पाना कोई कम बड़ी बात नहीं है। इस तथाकतिथ आभासी दुनिया में बड़े प्यारे लोग हैं जो स्पेस बनाकर बड़ी गरिमापूर्ण दोस्ती निभा रहे है। दोस्तों का ये भरापूरा परिवार मेरी ताकत और आदत दोनों बन गए है। कुछ दोस्त तो इतने प्यारे हैं क़ि ये अगर मुझसे दोस्ती समाप्ति की घोषणा कर दें तो मै रो पडूं ।फेसबुक ने मुझे खासी पहचान भी दी। बहुत से मित्रों से मिलना जुलना भी हुआ। मज़ा आ गया उनसे मिलकर। चेटिंग वेटिग में बेहद कंजूसी बरतने के बावजूद कुछ अपनों से बतिया ही लिया। मुझे ख़ुशी है क़ि फेसबुक पर मेरे अधिकतर दोस्त सह्रदय हैं। और इस माध्यम पर अपने होने की ज़रूरत क। लेकर काफी गंभीर है। ये लोग फेसबुक को सार्थकता दे रहे है। फेसबुक ने मेरा कई नुक्सान भी किया। इसके चलते मेरी आँखे कमजोर हुई। एकाग्रता में कमी आई । लिखने पढने की आदत बहुत कम हो गयी। मै अब कही आना जाना एवाइ करने लगा हूँ। भीड़ का हिस्सा तो मै पहले भी कभी नहीं बना पर फेसबुक ने मुझे अकेले जीने की कला सिखा दिया। ये कला मुझे पसंद नहीं। समाज मुझे प्रिय है। कभी दो किताबें लेकर मै यमुना किनारे घंटों पढता रहता था। आज अपने मोबाइल के साथ कमरे में कैद हो गया हूँ। सेहत में भी गिरावट महसूस कर रहा हूँ। फेसबुक ने मुझे अकेला कर दिया है।
      मित्रों अधिकता हर चीज़ की बुरी होती है। फेसबुक बुरा नहीं है पर इसके प्रति मेरा अधिकता का आग्रह नुक्सान देह है। बदलूँगा इस बुरी आदत को।
      आपसे मुलाक़ात होती रहेगी। इसी फेसबुक पर। कम मिलेंगे लेकिन जब मिलेंगे पूरी गर्माहट के साथ मिलेगे। आपसे बातों के लिए सबसे अच्छा माध्यम भी तो है फेसबुक।......